बरसों पहले, कक्षा 6 या 7 में पढ़ने वाली दो सहेलियाँ एक संजीदा विषय पर बात करती हुई, “अति हर चीज़ की बुरी होती है, सीता माता अति सुंदरी थीं, इसीलिए रावण उन्हें हर ले गया।” अचानक पलक झपकती है और एक नई पीढ़ी सामने आकर खड़ी हो जाती है। कल की वह दोनों सहेलियाँ आज खुद युवा लड़कियों की माँ हैं और दोनों को लिखने का शौक़ है मगर दोनों एक-दूसरे से दूर, अलग-अलग शहरों में हैं । अचानक दृश्य बदलता है और दोनों फिर से एक ही शहर में हैं, लेखन की ज़मीन पर अपने पैर जमाती हुई, फिर से वैसी ही संजीदा बातें करती हुई, अपनी लेखनी को मज़बूत करने के तरीके तलाशती हुई। कहानी लगती है ना! मगर कहानी नहीं, हकीकत है, थोड़े से इत्तेफ़ाक़ ज़रूर हैं।
आज जब मेरी बचपन की सहेली Ranjana Mishra की लिखी हुई किताब, “कुछ बातें कुछ यादें कुछ सवाल” मेरे हाथ में आई तो बचपन ताज़ा हो गया। बचपन का अहम हिस्सा, हमारा स्कूल रंजना की किताब में जगह-जगह पर है, कभी Moral Science की किताब के ज़िक्र में, तो कभी स्कूल में मनाए जाने वाले #क्रिसमस की यादों में। रंजना ने इस किताब में अपना बचपन जिया है और उसके साथ-साथ मैंने भी क्योंकि उसके और मेरे बीच बहुत कुछ common है, स्कूल, सहेलियाँ, रांची, तब का बिहार, अब का बिहार!
किताब की सरलता इसे विशेष बनाती है, और cover page अपने-आप ही सब कुछ कह रहा है, एक और striking feature का ज़िक्र ज़रूरी है, इसकी branding वाला carry bag जो अभी भी मेरे पास है।
मेरी प्यारी सहेली को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ! उम्मीद है, यह सिलसिला चलता रहेगा और लेखन #fevicol बनकर हम दोनों को जोड़े रखेगा।
अपने ऑटोग्राफ वाली यह engaging किताब भेजने के लिए बहुत शुक्रिया, सखी!



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